ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक आवंटन से सम्बन्धित मामलें में निजी कम्पनियों, इनके निदेशक, राज्य के तत्कालीन मंत्री, तत्कालीन अपर सचिव सहित छः आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 06.10.2020

कोयला मामलों के विशेष न्यायाधीश, सी बी आई, नई दिल्ली ने जिला गिरिडीह (झारखण्ड) स्थित ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक आवंटन से सम्बन्धित मामलें में मैसर्स कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजिस लिमिटेड (M/s Castron Technologies Ltd.), धनबाद; श्री महेन्द्र कुमार अग्रवाल, कम्पनी के तत्कालीन निदेशक; मैसर्स कैस्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड (M/s Castron Mining Ltd.); श्री दिलीप रे, तत्कालीन राज्य कोयला मंत्री; श्री प्रदीप कुमार बनर्जी, कोयला मंत्रालय के तत्कालीन अपर सचिव तथा श्री नित्या नंद गौतम, कोयला मंत्रालय के तत्कालीन परामर्शदाता (परियोजना) को आज दोषी ठहराया गया।

सी बी आई ने जिला गिरिडीह (झारखण्ड) में स्थित ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक को मैसर्स कैस्ट्रोन टेक्नालॉजिस लिमिटेड (सी टी एल), धनबाद को आवंटित करने के सम्बन्ध में मैसर्स कैस्ट्रोन टेक्नालॉजिस लिमिटेड एवं अन्यों के विरुद्ध दिनॉक 07.01.2014 को एक मामला दर्ज किया। ऐसा आरोप था कि मैसर्स कैस्ट्रोन टेक्नालॉजिस लिमिटेड, धनबाद (तत्कालीन बिहार, वर्तमान में झारखण्ड राज्य में) ; मैसर्स कैस्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड, कोलकाता तथा इन कम्पनियों के निदेशकों ने आपस में एवं लोक सेवकों ने ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक के आवंटन के मामले में भारत सरकार को धोखा देने के उद्देश्य से षड़यंत्र किया। ऐसा आगे आरोप था कि उक्त षड़यंत्र में, मैसर्स कैस्ट्रोन टेक्नालॉजिस लिमिटेड को सम्बन्धित लोक सेवकों द्वारा आधिकारिक स्थिति के दुरूपयोग के माध्यम से जिला गिरिडीह (तत्कालीन बिहार, वर्तमान में झारखण्ड राज्य में) में स्थित ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक आवंटित किया गया।

जॉच के दौरान, ऐसा ज्ञात हुआ कि उक्त लोक सेवकों के द्वारा ब्रहमाडीह कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए बनाए गए दिशा निर्देशों के उल्लंघन के द्वारा कथित रुप सें उक्त कम्पनी का अनुचित पक्षपात लिया गया। जॉच से यह भी पता चला कि कंपनी, कोयले की खपत के अंतिम उपयोग संयंत्र स्थापित करने के लिए थी, लेकिन उसने इसे स्थापित नही किया। ऐसा भी आरोप था कि ब्रहमाडीह (Brahmadiha) कोल ब्लॉक, किसी भी समय कैप्टिव (Captive) कोल माइनिंग की सूची में शामिल नही था।

गहन जॉच के पश्चात, उक्त 06 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर हुआ।

इस मामलें में दस्तावेजी प्रमाण के अतिरिक्त, सी बी आई ने 19 गवाहों सहित लगभग 51 अभियोग पक्ष के गवाहों को उनके हलफनामें के माध्यम से परीक्षण किया।

विचारण अदालत ने उक्त आरोपियों को कसूरवार पाया एवं उन्हे दोषी ठहराया। सजा के प्रारुप (Quantum of sentence) हेतु दिनॉक 14.10.2020 को होने वाली बहस के लिए मामलें को स्थगित कर दिया गया है।

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