निदेशक, सीबीआई ने साइबर क्राइम इन्‍वेस्‍टीगेशन एवं साइबर फोरेन्सिक्‍स विषय पर आयोजित पहले राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्वघाटन किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 04.09.2019

निदेशक, सीबीआई श्री ऋषि कुमार शुक्‍ला ने आज साइबर क्राइम इन्‍वेस्‍टीगेशन एवं साइबर फोरेन्सिक्‍स विषय पर आयोजित पहले राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्वघाटन नई दिल्‍ली स्थित सीबीआई, मुख्‍यालय में किया। सीबीआई के द्वारा आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय सम्‍मेलन में सीबीआई के अधिदेशों में से एक को समाविष्‍ट करना है जिसमें अन्‍तर-राज्‍यीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय प्रभाव वाले अपराधों की जॉंच करता है। सम्‍मेलन में राज्‍य एवं केन्‍द्र शासित पुलिस में साइबर अपराध से संबद्व पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस अधीक्षक, केन्‍द्रीय संस्‍थाओं, गृहमंत्रालय, इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, अन्‍य मंत्रालय, विधि प्रवर्तन एजेन्सियों (एल.ई.ए) के विशेषज्ञों तथा शिक्षा विदों सहित लगभग 50 अधिकारी हिस्‍सा ले रहे।

सम्‍मेलन के दौरान, मोबाइल/ डिजिटल फोरेन्सिक्‍स, अन्‍तर विधि प्रवर्तन सूचना/ आसूचना आदान-प्रदान, विदेशों से डिजिटल प्रमाण प्राप्‍त करने, बाल यौन अपराध सहित ऑन लाइन से होने वाली हानियों, सोशल मिडिया, सेवा प्रदाताओं एवं विधि प्रवर्तन एजेन्सियों के मध्‍य डेटा के आदान-प्रदान के लिए मानक प्रारूप बनाने, साझा दायित्‍व, इलेक्‍ट्रानिक प्रमाण की स्‍वीकार्यता सहित विधि प्रवर्तन महत्‍व के विभिन्‍न विषयों/ मुद्दों पर बहुत से व्‍याख्‍यान, प्रस्‍तुति एवं पैनल चर्चा जैसे विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

अपने उद्वघाटन सम्‍मेलन में, निदेशक, सीबीआई श्री ऋषि कुमार शुक्‍ला ने कहा कि सम्‍मेलन का उद्देश्‍य एक मंच तैयार करना एवं साइबर अपराध की चुनौतियों पर चर्चा करने तथा समाधान खोजने के लिए जॉंचकर्ताओं, अधिवक्‍ताओं, फोरेन्सिक विशेषज्ञों तथा शिक्षा विदों को एक साथ लाना है। यह विभिन्‍न राज्‍य पुलिस एवं विधि प्रर्वतन एजेन्सियों के अनुभवों से सिखने के अच्‍छे तौर तरीकेों को साझा करने का भी मंच होगा। निदेशक सीबीआई ने जोर दिया कि आधुनिक विश्‍व में, प्रत्‍येक क्षेत्र, चाहे वह स्‍वास्‍थ, बिजली, वित्‍त, जल आपूर्ति तथा अवसंरचना हो, सभी को डिजिटाइड कर दिया गया है। जबकि डिजिटाईजेशन ने नागरिक सेवाओं की गुणवत्‍ता को बढ़ाने के साथ ही कई स्‍तर पर अतिसंवेदनशीलता को भी बढ़ा दिया है।

निदेशक सीबीआई ने कहा कि क्षमता संवर्धन के लिए तथा दक्ष जॉचकर्ताओं, डिजिटल फोरेन्सिक विशेषज्ञों, अभियोजकों तथा न्‍यायिक अधिकारियों जो कि डिजिटल क्षेत्र के जानकार हो का समूह बनाने की त्‍वरित अवश्‍यकता है।

श्री शुक्‍ला ने आगे कहा कि साइबर अपराध, विधि प्रर्वतन अधिकारियों के समक्ष अनोखी चुनौतियॉं पेश करता है। इस तरह के अपराध जटिल होते हैं एवं इनका पता लगाने के लिए निश्चित कौशल एवं फौरेंसिक कौशल की अवश्‍यकता होती है। प्रमाण, अवश्‍यक रूप से अस्थिर होते हैं एवं डिजिटल प्रमाण, विदेशों में स्थित होते है। उन्‍होने याद दिलाया कि वास्‍तव में इस तरह के अपराध सीमाओं से परे होते हैं और यही कारण है कि जब जॉंच प्रगति पर होती है तो पारंपारिक क्षेत्राधिकार के सिद्वांत, चुनौतियों की तरह पेश होते हैं। निदेशक, सीबीआई ने यह भी कहा कि इन साइबर अपराधों से प्रभावी एवं आपसी सहयोग से शीघ्रतापूर्वक लड़ने के लिए विधि प्रवर्तन एजेन्सियों को स्‍वम् को लैस करने की तुरन्‍त अवश्‍यकता है।

श्री शुक्‍ला ने दिल्‍ली विशेष पुलिस स्‍थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत राज्‍य सरकारों की सहमति की अवश्‍यकता के मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्‍होने द्वैध (Dichotomous) स्थिति के बारे में बताया, जहॉं सीबीआई, कुछ राज्‍य सरकारों की असहमति के कारण अन्‍तर-राज्‍यीय अपराधों की जाँच में अपने अधिदेश को पूरा करने में असमर्थ हैं। अपने उद्वघाटन सम्‍बोधन के अन्‍त में निदेशक, सीबीआई ने कहा कि जैसा कि भारत डिजिटल क्रांति का हिमायती है, विधि प्रवर्तन अधिकारियों को मूल बातों पर ध्‍यान केंद्रित करना चाहिए जो साइबर अपराधों की जॉंच की निगरानी एवं प्रभावपूर्ण निवारक कार्यवाई करने में मदद करेगा। साइबर अपराधों की जटिलता बढ़ने के साथ, प्रर्वतन एजेन्सियों के सामने भविष्‍य में चुनौतियॉं और अधिक जटिल हो जाएगी।

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