सीबीआई ने ओडिशा से सम्‍बन्धित चिट फण्‍ड मामलों में से एक मामले में पूरक आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 29.08.2019

सीबीआई ने चिट फण्‍ड मामले की जारी जॉंच में भारतीय दण्ड संहिता की सुसंगत धाराओं तथा ईनामी चिट और धन परिचालन स्‍कीम (पाबंदी) अधिनियम, 1978 आदि के तहत होटल के एक प्रतिनिधि एवं ओडिशा क्रिकेट संघ के तत्‍कालीन मानद सचिव के साथ ओडिशा क्रिकेट संघ सहित तीन निजी व्‍यक्तियों के विरूद्ध भुवनेश्‍वर की नामित अदालत में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने वर्ष 2013 की समादेश याचिका (सी) संख्‍या 401 में दिनांक 09.05.2014 को माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में ओडिशा की कम्‍पनी समूह एवं अन्‍य के विरूद्ध वर्तमान मामला दर्ज किया।

आगे की जॉंच के दौरान, ऐसा आरोप था कि ओडिशा क्रिकेट संघ ने अपने मानद् सचिव के माध्‍यम से एवं ओडिशा की कम्‍पनी समूह के अपराधिक षड़यंत्र में उक्‍त कम्‍पनी समूह को बढ़ावा दिया ताकि कम्‍पनी की विश्‍वसनीयता जनमानस के नजरों में उठ सके और उक्‍त कम्‍पनी समूह द्वारा पेश विभिन्‍न योजनाओं में ज्‍यादातर लोग निवेश करें। उक्‍त बढ़ावा देने के बदले में, उन्‍होने ओडिशा रणजी क्रिकेट टीम के प्रायोजन तथा ओडिशा प्री‍मीयर लीग, 2011 के टाइटल प्रायोजन की आड़ में उक्‍त कम्‍पनी समूह से एक करोड़ रू. (लगभग) की राशि कथित रूप से स्‍वीकार की। ऐसा भी आरोप था कि होटल के प्रतिनिधि ने अन्‍य सह आरोपी व्‍यक्तियों के साथ अपराधिक षड़यंत्र में बालासोर तथा भुवनेश्‍वर स्थित उक्‍त कम्‍पनी समूह की अचल सम्‍पत्तियों के गबन में सक्रिय रूप से संलिप्‍त थे एवं इस प्रकार, उक्‍त कम्‍पनी समूह की धनराशि से खरीदी गई उक्‍त सम्‍पत्तियों के गबन में साझीदार हुए। अपराधिक षड़यंत्र में आगे , उक्‍त आरोपियों ने कथित रूप से दो अचल सम्‍पत्तियों की बिक्री से प्राप्‍त मुनाफे का गबन किया।

पूर्व में, उक्‍त कम्‍पनी समूह (ओडिशा राज्‍य में संचालित प्रसिद्व चित फण्‍ड कम्‍पनियों में से एक कम्‍पनी) की आठ कम्‍पनियों/ फर्मों सहित 33 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध सीबीआई के द्वारा 04 पूरक आरोप पत्र सहित 06 आरोप पत्र दायर किया गया।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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