18 वें डी.पी कोहली स्‍मृति व्‍याख्‍यान के अवसर पर भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश कल व्‍याख्‍यान देगें

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 12.08.2019

18 वें डी.पी कोहली स्‍मृति व्‍याख्‍यान के अवसर पर भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश श्री रंजन गोगोई कल विज्ञान भवन, नई दिल्‍ली में व्‍याख्‍यान देगें। व्‍याख्‍यान का विषय ‘‘ द रोल ऑफ पुलिस इन स्‍ट्रेन्‍थनिंग जस्टिस डिलीवरी ’’ होगा। इस अवसर पर वर्ष 2016, 2017 एवं 2018 के लिए ‘बेस्‍ट डिटेक्टिव कॉंस्‍टेबल’ का पुरस्‍कार भी दिया जाएगा।

प्रतिष्ठित डी.पी. कोहली स्‍मृति व्‍याख्‍यान, सीबीआई के द्वारा अपने संस्‍थापक निदेशक स्‍वर्गीय श्री डी.पी. कोहली के सम्‍मान में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। वे वर्ष 1955 से 1968 के मध्‍य, विशेष पुलिस स्‍थापना एवं केन्‍द्रीय जॉंच ब्‍यूरो के प्रमुख रहे। अपने कार्यकाल के दौरान सीबीआई की गतिविधियों में विस्‍तार करके उसे एक मजबूत आधार प्रदान किया एवं अपराध की जॉंच के प्रभावशाली साधन के रूप में तब्‍दील किया। श्री कोहली ऐसे भविष्‍यद्रष्‍टा थे जिन्‍होने प्रभावशाली व जिवंत संस्‍थान के रूप में सीबीआई के विकास की नींव डाली। वे सीबीआई मामलों की छानबीन को पुलिस का प्रमुख कार्य मानते थे। उन्‍होने छानबीन के कार्य में सिपाहियों एवं निचले क्रम के कर्मियों की भागीदारी को प्रोत्‍साहित किया। उन्‍होने ही बेस्‍ट डिटेक्टिव कॉंस्‍टेबल/ हेड कॉस्‍टेबल हेतु पुरस्‍कार स्‍थापित किया जिसे ‘डी.पी. कोहली अवार्ड’ के तौर पर जाना जाता है। उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि आज सीबीआई को व्‍यावसायिकता व निष्‍पक्षता की ख्‍याति और समाज के सभी वर्गों का भरोसा प्राप्‍त है।

श्री डी.पी.कोहली को मजबूत आधारशिला पर सीबीआई को संगठित करने में उनकी भूमिका के लिए वर्ष 1967 में पद्म भूषण पुरस्‍कार प्रदान किया गया। पद्म भूषण के प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि ‘‘ उन्‍होने मजबूत आधारशिला पर इस संगठन को गठित किया, इसकी गतिविधियों को विस्‍तार दिया और इसे जॉंच का प्रभावी साधन बनाया..... ब्‍यूरो, जो कि विशेष पुलिस स्‍थापना के तहत गठित हुआ, ने सरकार में सत्‍यनिष्‍ठा को बढ़ावा देने के लिए सरकार के उच्‍च प्रभावी, स्‍वतंत्र एवं निडर संस्‍था के तौर पर ख्‍याती को पाया। केन्‍द्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो की शानदार सफलता.....बड़े पैमाने पर श्री कोहली की संस्‍थागत क्षमता और नेतृत्‍व की गुणवत्‍ता के कारण है।’’

भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश माननीय श्री रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत प्रारम्‍भ की। उन्‍होने मुख्‍यत: गुवाहाटी उच्‍च न्‍यायालय में वकालत की एवं 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्‍च न्‍यायालय में नियमित न्‍यायाधीश नियुक्‍त हुए। वे 9 सितम्‍बर, 2010 को पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय में स्‍थानान्‍तरित हुए। वे 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश के तौर पर नियुक्‍त हुए। वे, 23 अप्रैल, 2012 को सर्वोच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश के तौर पर प्रोन्‍नत हुए तथा 3 अक्‍टूबर, 2018 को भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश के तौर पर नियुक्‍त हुए।

सीबीआई की स्‍थापना 01 अप्रैल, 1963 के भारत सरकार के संकल्‍प के द्वारा तब की गई जब इस बात की आवश्‍यकता महसूस हुई कि एक केन्‍द्रीय पुलिस एजेन्‍सी होनी चाहिए जो न केवल घूसखोरी व भ्रष्‍टाचार के मामलों की जॉंच करें बल्कि केन्‍द्रीय कर सम्‍बन्धि कानूनों के उल्‍लंघन, भारत सरकार के विभागों में धोखाधड़ी, सार्वजनिक मिश्रित पूंजी कम्‍पनियों की धोखाधड़ी,पासपोर्ट धोखाधड़ी, महासागरों/ हवाई जहाजों में होने वाले अपराधों एवं संगठित गिरोहों के पेशेवर अपराधियों द्वारा किए गए गम्‍भीर अपराधों की भी जॉंच कर सके।

पिछले पॉंच दशकों से ज्‍यादा समय में, सीबीआई ने अपने आपको एक भ्रष्‍टाचार निवारण संस्‍था से बहुमुखी, बहु-विधायी केन्‍द्रीय पुलिस कानून प्रर्वतन संस्‍था के रूप में विकसित किया एवं देश की प्रमुख जॉंच संस्‍था के तौर पर उभरी है।

आज, सीबीआई, जॉंच व अभियोजन के क्षेत्र में न केवल प्रमुख है बल्कि विधि प्रवर्तन के क्षेत्र में अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सहयोग में भी प्रमुख है। पिछले कुछ वर्षों में, डी.पी. कोहली स्‍मृति व्‍याख्‍यान के अवसर पर अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विषयों पर प्रख्‍यात वक्‍ताओं ने सम्‍बोधित किया।

वर्ष 2016, 2017, 2018 के लिए ‘बेस्‍ट डिटेक्टिव कॉंस्‍टेबल/ हेड कॉंस्‍टेबल हेतु डी.पी. कोहली पुरस्‍कार श्री एम. चन्‍द्रशेखर, प्रधान सिपाही, बी.एस. एण्‍ड एफ.सी, बंगलौर; श्री आनन्‍द राजाराम पांढेरे, सिपाही, एस.यू, मुम्‍बई; श्री ए. शेखर, प्रधान सिपाही, एसीबी, चेन्‍नई तथा श्री सथीश कुमार वी., सिपाही, एसीबी, भुवनेश्‍वर को दिया जाएगा। सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक, सर्वश्रेष्‍ठ जॉंच अधिकारियों के लिए स्‍वर्ण पदक, सर्वश्रेष्‍ठ कार्मिक एवं सर्वश्रेष्‍ठ शाखा आदि सहित 34 अन्‍य पुरस्‍कार भी प्रदान किए जाएगें।

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