व्‍यापम से सम्‍बन्धित एक मामले में उम्‍मीदवार एवं परमधारी को पॉंच वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 18.07.2019

सीबीआई ने माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के दिनांक 09.07.2015 एवं 11.09.2015 के आदेशों पर मामला दर्ज किया एवं पी.जी.वी. कालेज, ग्‍वालियर के तत्‍कालीन केन्‍द्र अधीक्षक एवं प्रधानाचार्य से प्राप्‍त शिकायत के आधार पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419, 420, 176 एवं मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त परीक्षा अधिनियम की धारा 3/4 के तहत बृजेश कुशवाहा के विरूद्ध जनकगंज पुलिस स्‍टेशन में दिनांक 30.09.2012 को पूर्व में दर्ज प्राथमिक सूचना रिर्पोट संख्‍या 591/12 की जॉंच को अपने हाथों में लिया। ऐसा आरोप था कि दिनांक 30.09.2012 को आयोजित पी.सी.आर.टी.-2012 की लिखित परीक्षा के दौरान उम्‍मीदवार लक्ष्‍मण जाटव, अनुक्रमांक संख्‍या 272455 के प्रवेश पत्र पर चिपका फोटो, परीक्षा में उपस्थित उम्‍मीदवार से नही मिल रही थी।

 सीबीआई जॉंच से ज्ञात हुआ कि उम्‍मीदवार लक्ष्‍मण जाटव ने कपटपूर्ण तरीके से पी.सी.आर.टी-2012 परीक्षा को पास करने के इरादे से मध्‍यस्‍थ व्‍यक्ति एवं परनामधारी के साथ षड़यंत्र किया। उक्‍त षड़यंत्र के अनुसरण में, आरोपी बृजेश कुशवाहा (परनामधारी) जानबूझकर अपने आपको लक्ष्‍मण जाटव के तौर पर पेश करते हुए अनुक्रमांक संख्‍या-272455 के तहत उम्‍मीदवार लक्ष्‍मण जाटव के स्‍थान पर दिनांक 30.09.2012 को आयोजित होने वाली पी.सी.आर.टी.-2012 परीक्षा में उपस्थित हुआ और उसकी पहचान पर संन्‍देह होने पर परीक्षा निरीक्षक के द्वारा पकड़ा गया। जॉंच के पश्‍चात, सीबीआई ने दिनांक 02.09.2016 को तीन आरोपियों यथा परनामधारी, मध्‍यस्‍थ व्‍यक्ति तथा उम्‍मीदवार के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया।

व्‍यापम मामलों की विचारण अदालत, ग्‍वालियर ने आरोपी यथा लक्ष्‍मण जाटव (उम्‍मीदवार) तथा बृजेश कुशवाहा (परनामधारी) को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनो आरोपियों को कसूरवार पाया एवं मध्‍यस्‍थ व्‍यक्ति को बरी कर दिया।

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