आर.टी.आई. कार्यकर्ता श्री अमित जेठवा की हत्याे से सम्बसन्धित मामले में पूर्व संसद सदस्य सहित सात आरोपियों की आजीवन कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 11.07.2019

सीबीआई मामलों के विशेष न्याेयाधीश, शहरी सत्र न्या यालय, भद्रा, अहमदाबाद (गुजरात) ने आज आर.टी.आई कार्यकर्ता श्री अमित जेठवा की हत्याई से सम्बदन्धित सीबीआई के मामले में पूर्व संसद सदस्ये सर्व श्री दीनू भाई बोघा भाई सोलंकी; तत्काेलीन पुलिस सिपाही बहादुर सिंह धीरूबा वढेरा; पचन भाई उर्फ शिव भाई देसाई; संजय प्रभात भाई चौहान; प्रताप भाई उर्फ शिवभाई; उदाजी एवं शैलेश ननालाल पाण्ड्या को 25,000 रू. से लेकर 15 लाख रू. के जुर्माने सहित आजीवन कारावास की सजा सुनाई ।

सीबीआई ने गुजरात उच्चज न्यारयालय के आदेश पर दिनांक 06.10.2012 को मामला दर्ज किया एवं भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302,114 तथा शस्त्रज अधिनियम , 1959 की धारा 25 (1) (बी)(ए) के तहत सोला पुलिस स्टे शन, अहमदाबाद में पूर्व में दर्ज प्राथमिक सूचना रिर्पोट संख्याच 163/ 2010 की जॉंच को अपने हाथों में लिया, इसमें आरोप है कि पर्यावरणविद एवं आर.टी.आई कार्यकर्ता श्री अमित जेठवा की सत्यदमेव कॉम्लैहै्तक्सर, अहमदाबाद में 20.07.2010 को हत्या कर दी गई। मृतक के पिता पुलिस की जॉंच से संतुष्ट, नही थे एवं उन्हो0ने गुजरात उच्च न्या यालय पहॅुच कर आरोप लगाया कि जूनागढ़ संसद सदस्यम श्री दीनू भाई बोघा भाई सोलंकी की भूमिका को पुलिस के द्वारा अनदेखा किया गया। इसके पश्चाात, गुजरात उच्चल न्याॅयालय ने दिनांक 25.09.2012 को अपने आदेश द्वारा मामले में आगे की जॉंच के लिए सीबीआई को स्था0नान्त2रित कर दिया।

आगे की जॉंच के दौरान, पर्याप्त रूप से प्रमाण सामने आए कि श्री अमित जेठवा , श्री दीनू भाई बोघा भाई सोलंकी की अवैध गतिविधियों के बारे में जान कारी एकत्र कर रहे थे एवं दिनांक 28.06.2010 को उन्होकने गुजरात उच्चज न्या यालय में एक जनहित याचिका दायर की। इस जनहित याचिका में, श्री दीनू भाई बोघा भाई सोलंकी एवं उनका भतीजा प्रताप भाई उर्फ शिव भाई सोलंकी दिनांक 06.07.2010 को पक्षकार बने। ऐसा भी पता चला कि श्री दीपू भाई बोघा भाई सोलंकी ने अमित जेठवा को रास्ते से हटाने के लिए अन्य सह आरोपी व्याक्तियों के साथ षड़यंत्र किया।

गहन जॉंच के पश्चादत, एसीजेएम (विशेष मामले), मीरजापुर, अहमदाबाद की अदालत में आरोपी व्यजक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर हुआ।

विचारण अदालत ने आरोपियों को कसूरवार पाया व उन्हें दोषी ठहराया।

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