सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी से सम्बिन्धित मामले में देश व्या्पी विशेष अभियान के तहत 12 राज्योंध/ केन्द्रि शासित प्रदेशों में स्थित लगभग 48 स्थाानों पर तलाशी ली और 14 मामले दर्ज किए

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 02.07.2019

सीबीआई ने विभिन्नग कम्प।नियों/ फर्मों; उनके प्रोत्साईहकों/ निदेशकों; बैंक कर्मियों तथा अन्यि अज्ञातों के विरूद्ध जॉंच पड़ताल में दिल्ली , मुम्बपई, लुधियाना, थाणे, वलसाड, पुणे, पलानी, गया, गुरूग्राम, चण्डीुगढ़, भोपाल, सूरत, कोल्लाकर, सिलवासा, अलीगढ़, फाजिल्का,, मुक्तीसर, भवानीगढ़ सहित लगभग 48 स्था,नों पर आज तलाशी ली।

पहला मामला, बैंक को ब्यािज सहित लगभग 202 करोड़ रू. की सदोषपूर्ण हानि पहुँचाने की शिकायत पर मुम्ब्ई स्थित निजी हीरा कम्प़नी; इसके प्रोत्साहहक, 05 निदेशकों; एक निजी व्यिक्ति तथा अज्ञात लोक सेवकों/ अन्यइ अज्ञातों के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि विदेशी बुलियन बैंकों अर्थात बैंक ऑफ नोवा स्कॉ.टिया, लन्दआन एवं स्टैेण्ड र्ड, चार्टेड पी.एल.सी. लंदन और पैकिंग क्रेडिट को जारी 03 एस.बी.एल.सी के मामले में एक्जिम बैंक ऑफ इण्डिया के साथ आरोपी व्यिक्तियों ने धोखाधड़ी की। अपराध करने के तरीके के बारे में शिकायत में आरोप लगाया गया कि उक्तक मुम्बाई स्थित निजी कम्पबनी के प्रोत्साीहक एवं निदेशक और अन्योंव के साथ मिली भगत में यू.ए.ई. में बैठे निजी व्यनक्ति के द्वारा नियंत्रित कथित खरीदारों सहित आरोपी व्येक्तियों ने अपने भुगतान को जानबूझकर नही किया जो कि बुलियन बैंको के द्वारा अतिरिक्ते साख पत्र के बुलावे का कारण बना।

मुम्ब ई में तलाशी की गई।

दूसरा मामला, बैंक को 143.25 करोड़ रू. की कथित हानि पहुँचाने के कारण स्टेमट बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्तथ शिकायत के आधार पर पर लुधियाना स्थित निजी कम्प नी; इसके प्रबन्धत निदेशक/ जमानती; निदेशक/ जमानती; अंशधारक/ जमानती; लुधियाना स्थित अन्य निजी कम्पजनी; अज्ञात लोक सेवकों तथा निजी व्यतक्तियों के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि लुधियाना स्थित कपड़ा विनिर्माण एवं निर्यात कम्प नी के आरोपी निदेशकों एवं जमानतियों ने अज्ञात बैंक कर्मियों तथा अन्योंम के साथ मिलीभगत में खातों में हेर फेर एवं जाली दस्तायवेजों यथा इनवायसेज तथा लॉरी की रसीदों, विभिन्नश आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे गए सामानों के आवागमन को गलत तरीके से दर्शाने का सहारा लेकर एस.बी.आई, व्या वसायिक शाखा, लुधियाना से 161.24 करोड़ रू. (लगभग) की साख सुविधाओं को बेईमानी एवं कपटपूर्ण तरीके से प्राप्तो कर लिया। कम्प नी ने कथित रूप से धनराशि को बेईमानी से निकाल लिया और अपने बकाए का भुगतान करने में चूक गई तथा बैंक को 143.25 करोड़ रू. (लगभग) की सदोषपूर्ण हानि हुई।

लुधियाना में 04 स्था.नों में तलाशी ली गई।

तीसरा मामला, एस.बी.आई. को 98.75 करोड़ रू. (लगभग) की कथित हानि पहुँचाने के कारण स्टे.ट बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्त शिकायत के आधार पर पर जिला कोलार (कर्नाटक) स्थित कम्पंनी; 04 निदेशकों एवं अन्यग अज्ञातों के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि उक्त1 निजी कम्प नी, जिला कोलार (कर्नाटक) स्थित अपने कारखाना परिसर में लेड एसिड के विनिर्माण करते हुए स्टे ट बैंक ऑफ इण्डिया, व्याेवसायिक शाखा, इरोड, तमिलनाडु से समय-समय पर विभिन्नि सावधि ऋण प्राप्ति किया और धनराशि को अन्यइ मद में लगाया। उक्त षड़यंत्र मं़ आगे, कोलार स्थित निजी कम्पऔनी ने मैसर्स बी.एस.एन.एल, केरल टेलीकाम सर्किल, त्रिवेन्द्रिम तथा अन्य निजी कम्प नी के नाम पर इनवोइसिस (Invoices) एकत्र की तथा कैनबैंक फैक्टरर्स लिमिटेड बंग्लौ्र से कोलार स्थित निजी कम्पबनी के द्वारा रियायत प्राप्तै कर ली गई। हालॉंकि, ये इनवाइसेज, वर्ष के अन्त में बकाया राशि में हेर फेर करने के लिए खाता बुकों में उक्तं निजी कम्प नी द्वारा साधन के तौर पर प्रयोग किए गए जर्नल वाउचर के खाता बुकों में नही नजर आई। कम्पदनी ने कथित रूप से भुगतान करने में धोखाधड़ी की, दिनांक 24.05.2016 को खाता गैर निष्पापदित सम्पकत्ति घोषित हुआ।

पलानी, थिरूपुर, कोलार एवं बंग्लौनर में तलाशी ली गई।

चौथा मामला, सेन्ट्ररल बैंक ऑफ इण्डिया, इलाहाबाद बैंक एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 131.79 करोड़ रू. (लगभग) की कथित धोखाधडी करने के कारण सेन्ट्रलल बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्तो शिकायत के आधार पर गया स्थित निजी होटल एवं रिर्सोट कम्प्नी तथा 12 अन्यों के साथ इसके निदेशक/ जमानती; चार्टेड अकाउन्टेिड के विरूद्ध दर्ज हुआ।

गया में 04 स्थाअनों पर तलाशी की गई।

पॉचवा मामला, व्यायज सहित लगभग 57.38 करोड़ रू. की हानि पहुँचाने के कारण यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्तड शिकायत के आधार पर गुलालवड़ी ,मुम्बलई स्थित निजी कम्पपनी एवं निदेशकों; वित्ती य सलाहकारों आदि सहित 05 अन्यम एवं अन्यि अज्ञात लोक सेवकों/ अन्योंय के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि वर्ष 2016-2018 के दौरान, उक्तह निजी कम्पतनी; इसके निदेशक और आरोपी व्याक्तियों ने 50 करोड़ रू. (लगभग) धनराशि की गैर वित्तन आधारित सीमा को जारी करने के लिए बैंक से वित्तीरय सहायता प्राप्तय करने के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया को धोखा देने के उद्देश्यग से मुम्बीई एवं अन्य स्थािनों पर आपराधिक षड़यंत्र में शामिल हुए।

मुम्बiई में 05 स्था नो पर तलाशी ली गई।

छठा मामला, बैंक भारी हानि पहुँचाने पर नया बाजार, दिल्लीा स्थित निजी कम्पमनी एवं अन्योंा के साथ 02 निदेशकों तथा अन्यि निजी व्योक्तियों के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि कम्प नी ने कपटपूर्ण तरीके से यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया, खारी बाउली शाखा, दिल्लीख से 55.56 करोड़ रू.(लगभग) की साख सुविधा प्राप्ती की तथा सिविल लाइन, दिल्लीस की सम्पात्ति की समानान्त र जमानत पेश की जो कि पंजाब एवं सिन्धी बैंक के पास पहले ही गिरवी थी एवं इस प्रकार बैंक के साथ धोखाधड़ी की।

दिल्लीा में तीन स्थाधनों पर तलाशी ली गई।

सातवॉ मामला, एन.सी.आर. स्थित निजी कम्पतनी तथा 09 अन्य निजी व्यवक्तियों के साथ इसके निदेशक और जमानती के विरूद्ध दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि कम्प नी ने बैंक के पास समानान्ततर जमानत के तौर पर गिरवी रखी गई दो सम्पात्तियों का अधिक मूल्यांपकन एवं जाली हक विलेख (Title Deeds) के आधार पर कारर्पोरेट बैंक, मिड कारर्पोरेट शाखा, सेक्ट्र-18, नोएडा से 93 करोड़ रू.(लगभग) की साख सुविधा कपटपूर्ण तरीके से प्राप्ता की।

दिल्लीt में 02 स्था नाों पर तलाशी ली गई।

आठवॉं मामला, यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्त शिकायत के आधार पर अलीगढ़ (उत्तयर प्रदेश) की निजी खाद्य कम्पेनी; इसके प्रबन्ध निदेशक; अन्य‍ निजी व्य़क्तियों तथा अन्यर अज्ञात व्यकक्तियों के विरूद्ध मामला दर्ज हुआ।

ऐसा आरोप था कि उक्ते निजी कम्प नी को यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के द्वारा 70 करोड़ रू. (लगभग) की साख सुविधा मंजूर की गई। बैंक के द्वारा ऐसा आगे आरोप लगाया गया कि आरोपी ने बैंक से हस्ताैन्तेरण की शुरूवात की और धनराशि को अन्य मद में लगाया तथा इस प्रकार बैंक के साथ धोखाधड़ी की। उक्तश व्यनक्तियों ने कथित रूप से अपने अवैध लाभ के लिए बन्ध क वस्तु‍ओं और अन्यश प्रतिभूतियों को बेच दिया एवं बैंक को 60 करोड़ रू. (लगभग) की हानि पहुँचाई।

गुरूग्राम एवं अलीगढ़ स्थित 03 स्थाबनों पर तलाशी ली गई।

नौवॉं मामला, एस.आई.डी.बी.आई. से प्राप्तु शिकायत के आधार पर चण्डीकगढ़ एवं पंजाब स्थित पॉंच निजी कम्प.नियों; इनके निदशकों/ प्रोत्साचहकों और अन्योंए के विरूद्ध दर्ज किया। ऐसा आरोप था कि उक्तप निदशकों/ प्रोत्सानहकों ने गॉंव दबवाला कलॉं स्थित सेन्ट्रयल प्रोसेसिंग यूनिट एवं बोदी वाला खड़क सिंह, फाजिल्कां स्थित चार प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट की ओर से मिले सहयोग पर दिनांक 01.03.2012 को एस.आई.डी.बी.आई, सेक्ट्र 17, चण्डीागढ़ से 1500 लाख रू. का सावधि ऋण प्राप्ति कर लिया। ऐसा भी आरोप था कि ऋणियों ने दिनांक 09.06.2014 को 1500 लाख रू. का सावधि ऋण-।। एवं 350 लाख रू. का सावधि ऋण-।।। के लिए पुन: आवेदन किया एवं उक्त सावधि ऋण का 31.12.2014 से 14.12.2015 के दौरान आठ किस्तोंत में भुगतान कर दिया गया। ऐसा आरोप था कि उक्तु ऋणों का पुर्नभुगतान नही किया गया और उक्त सावधि ऋण को जून 2017 को गैर निष्पावदित सम्प त्ति घोषित किया गया। ऐसा आरोप था कि ऋणी ने भूमि, भवन, कारखाना, मशीनरी तथा उक्तऐ परियोजना के लिए कार्यशील पूँजी हेतु अन्य, बैंको से ऋण प्राप्ता किया। ऐसा भी आरोप था कि आई.एम.एफ.पी.एल. ने उक्ति सावधि ऋणों को प्राप्तक करने के लिए एस.आई.डी.बी.आई. को गलत जानकारी एवं जाली दस्ता्वेजों को जमा कराया एवं अपने व्य्क्तिगत लाभ के लिए ऋण धनराशि को बेईमानी से निकाल लिया और इससे 4014.75 लाख रू. (ब्या ज सहित) लगभग की हानि हुई।

चण्डीकगढ़, भवानीगढ़, नई दिल्लीज, फाजिल्का तथा मुक्त‍सर सहित 08 स्थाीनों पर तलाशी ली गई।

दसवॉं मामला,बैंक ऑफ बड़ौदा से प्राप्त शिकायत के आधार पर भोपाल की निजी फर्म; इसके दो साझीदारों एवं अन्यश अज्ञात लोक सेवकों तथा निजी व्यनक्तियों के विरूद्ध दर्ज हुआ। ऐसा आरोप था कि वर्ष 2010 से 2017 के दौरान उक्ति साझादार फर्म ने बैंक ऑफ बड़ौदा हबीबगंज शाखा , भोपाल (मध्यक प्रदेश) के माध्य‍म से स्टॉरक एवं बुक डेब्‍ट्स के साथ साथ समानान्त0र प्रतिभूति को गिरवीं रख कर नकद साख सीमा प्राप्त की। आरोपियों व्यटक्तियों ने बैंक के साथ धोखाधड़ी बदनियति से आपराधिक षड़यंत्र में संलिप्त‍ हुए एवं बैंक को सदोषपूर्ण हानि पहुँचाई तथा 34.36 करोड़ रू. (लगभग) की धनराशि को अन्य मद में लगाने / बेईमानी से अन्य‍ मद में लगाने / बेईमानी से निकालने के द्वारा स्व म् को सदोषपूर्ण लाभ पहुँचाया। बैंक का बकाया न चुकाने के कारण दिनांक 31.03.2017 को फर्म का खाता गैर-निष्पासदित सम्पीत्ति घोषित हुआ।

भोपाल में तीन स्था2नों पर तलाशी ली गई।

ग्यातरहवॉं मामला, बैंक ऑफ बड़ौदा से प्राप्तस शिकायत के आधार पर सूरत स्थित निजी कपड़ा कम्पानी तथा निदेशक,जमानती सहितचारअन्योंक के विरूद्ध दर्ज हुआ। ऐसा आरोप था कि उक्तन कम्प,नी ने 132 जेट विविंग मशीनरी की खरीद के सन्दार्भ में जुलाई/ अगस्तम -2012 की अवधि के दौरान 28.20 करोड़ रू. (लगभग) की धनराशि की सावधि ऋण सुविधा से सम्ब न्धित बैंक ऑफ बड़ौदा, एस.एस.आई. सचिन शाखा, सूरत के साथ धोखाधड़ी की। कम्प नी ने 132 मशीन जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा, एस.एस.आई सचिन शाखा, सूरत से वित्ती य सहायता प्राप्तग थी, के स्थाौन पर सिर्फ 84 मशीन खरीदी। आरोपी व्यतक्तियों ने गैर-व्यापपारिक उद्देश्य् के लिए धनराशि को लगाया एवं इस प्रकार बैंक ऑफ बड़ौदा, एस.एस.आई. सचिन शाखा, सूरत को हानि पहुँचाई।

सूरत में तीन स्थाआन पर तलाशी ली गई।

वारहवॉं मामला, केनरा बैंक से प्राप्ति शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ। जिसमें आरोप है कि केनरा बैंक, कंचरापारा शाखा, पश्चिम बंगाल के तत्काालीन प्रबन्ध क ने आरोपी निजी व्यरक्तियों (ऋणियों) का अनुचित पक्ष लेने के लिए बैंक के दिशा निर्देशों, मानकों एवं प्रक्रियाओं का जानबूझकर उल्लंतघन करने के द्वारा कुछ निजी व्यरक्तियों एवं निजी फर्मों को 30.06.2014 से 09.03.2016 की अवधि के दौरान 32 ओ.डी.सी.सी, एम.एस.एम.ई. तथा सावधि ऋणों को मंजूर किया। सम्पनत्ति के स्वा2मित्वी का बनावटी एवं गलत/ जाली दस्ता0वेजों को स्वीककार कर के.वाई.सी मानको एवं मंजूरी पूर्व प्रक्रिया का भी जानबूझकर उल्लंोघन किया गया तथा इस प्रकार, आरोपी ने केनरा बैंक के अन्यक अज्ञात कर्मियों तथा अज्ञात निजी व्यपक्तियें के साथ मिली भगत में गलत उद्देश्यक के साथ उक्तो ऋणों को मंजूर किया, जिससे उक्त बैंक को 521.68 लाख रू. (लगभग) की सदोष पूर्ण हानि हुई।

उत्त।री 24 परगना में तीन परिसरों में तलाशी ली गई।

तेरहवॉ मामला, बैंक ऑफ इण्डिया को 91.36 करोड़ रू. (लगभग) की हानि पहॅुचाने पर एक निजी कम्पकनी एवं अन्यों के विरूद्ध दर्ज हुआ।

चौदहवॉं मामला, इण्डियन ओवरसीज बैंक को 69.98 करोड़ रू. (लगभग) की हानि पहुँचाने पर एक निजी कम्पवनी के निदेशकों एवं अन्यों के विरूद्ध मामला दर्ज हुआ।

उक्तd दो मामलों (13वें एवं 14वें) में ऐसा आरोप था कि आरोपी व्याक्तियों ने आपराधिक षड़यंत्र के अनुसरण में बैंकों के साथ क्रमश: 91.36 करोड़ रू. (लगभग) एवं 69.98 करोड़ रू. (लगभग) की धोखाधड़ी की। धोखाधड़ी का अपराध करने का तरीका यह था कि कम्पबनी ने अपनी बिक्री को टी.आर.पी./ सी.सी. खाता के माध्ययम से नही किया एवं कम्प‍नी ने बिक्री को बढ़ाने का प्रयास किया। बैंक के निदेशकों ने भी मंजूर मद से अन्य सीमा के लिए विनिर्माण क्षमता एवं धनराशि के उपयोग के बारे में बैंक को भी गलत सूचना दी एवं धनराशि को बेईमानी से निकाल लिया। कम्पमनी ने अनियमित बिक्री (Scrapped Spindles) से प्राप्तं धनराशि का भी गबन किया जिसे बैंक की पूँजी से कमाया गया था।

इन दो मामलों (13वे एवं 14वें) में सिलवासा, भिलाड़ (गुजरात), थाणे, पूणे एवं मुम्ब3ई में तलाशी की गई।

आगे की जाँच जारी है।

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