धोखाधड़ी के मामले में निजी फर्म के प्रबन्‍ध साझीदार सहित आठ आरोपियों को पॉंच से सात वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 07.06.2019

सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, एर्नाकुलम (केरल) ने मैसर्स ग्रीन वुड्स इण्डिया,कोचीन के प्रबन्‍ध साझीदार श्री एम.आर. सोमराज एन. नायर को 75 लाख रू. के जुर्माने के साथ 07 वर्ष की कठोर कारावास; मैसर्स ग्रीन वुड्स इण्डिया, कोचीन के साझीदार श्री अनन्‍थ नारायण भाट को 75 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास; श्री के.एन.राम चन्‍द्रन (व्‍यापारी) को 40 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास; श्री बीजू जार्ज (व्‍यापारी) को 40 लाख रू. के जुर्माने सहित 05 वर्ष की कठोर कारावास; श्री पॉल एन्‍टोनी अधव (व्‍यापारी) को 30 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास; श्री अजय बाबू राव कड़ (व्‍यापारी) को 03 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास; श्री राजा चन्‍द्र शेखर खारा (व्‍यापारी) को 02 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास तथा श्री कैलाश अंकुशभाई वाडकर (व्‍यापारी) को 02 लाख रू. के जुर्माने सहित 06 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने मामला दर्ज किया जिसमें आरोप है कि मैसर्स ग्रीन वुड्स इण्डिया ने अपने साझीदार श्री सोमराज एन नायर तथा श्री अनन्‍थ नारायण भट के माध्‍यम से मई से सितम्‍बर 2011 के दौरान एसबीआई ग्‍लोबल फैक्‍टर्स लिमिटेड (एसबीआई जीएफएल), भारत सरकार की सार्वजनिक कम्‍पनी के साथ धोखाधड़ी करने के लिए अन्‍य 06 निजि व्‍यक्तियों के साथ आपराधिक षड़यंत्र में शामिल हुए एवं कपटपूर्ण तरीके से बैंक ऑफ बड़ौदा, एर्नाकुलम मुख्‍य शाखा में संचालित मैसर्स ग्रीन वुड्स इण्डिया के नाम पर दिनांक 08.07.2010 को एक चालू खाता खोला। उक्‍त दोनो साझीदारों ने जानबूझ कर एसबीआई जीएफएल को प्रभावित किया एवं जाली दस्‍तावेज जमा किया तथा 05 करोड़ रू . की सीमा हेतु लेटर ऑफ क्रेडिट बिल डिस्‍काउन्टिग (Letter of Credit Bill Discounting-LCBD) की सुविधा प्राप्‍त की। उसके पश्‍चात, आरोपियों ने जाली साख पत्र (LC) पर छूट प्राप्‍त करने के लिए अन्‍य दस्‍तावेजों के साथ तथाकथित यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया, नारासंन्‍दा शाखा, गुजरात द्वारा 4,91,96,240 रू. के लिए जाली साख पत्र दिनांक 30.08.2011 को जमा किया। आरोपियों ने एसबीआई जीएफएल के साथ 4.91 करोड़ रू. (लगभग) की धोखाधड़ी की। आरोपी व्‍यक्तियों ने यूबीआई की टेलीफोन लाइन को अन्‍य दिशा में मोड़ने की युक्ति अपनाई ताकि एसबीआई जीएफएल, आरोपी व्‍यक्तियों के द्वारा की गई जाल साजी को न पकड़ सके।

जॉंच के पश्‍चात, नामित अदालत में आरोप पत्र दायर हुआ। विचारण अदालत ने आरोपियों को कसूरवार पाया व उन्‍हें दोषी ठहराया।

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