अलग-अलग मामलों में पेट्रोलियम तथा विस्‍फोटक सुरक्षा संगठन के विस्‍फोटक पदार्थों के तत्‍कालीन उप मुख्‍य नियंत्रक, को 05 वर्ष की कठोर कारावास एवं तत्‍कालीन आयकर अधिकारी को तीन वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 05.03.2019

सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, चन्‍दमारी, गुवाहाटी (असम) ने घूसखोरी के मामले में पेट्रोलियम तथा विस्‍फोटक सुरक्षा संगठन (पी.ई.एस.ओ.), गुवाहाटी के विस्‍फोटक पदार्थों के तत्‍कालीन उप-मुख्‍य नियंत्रक श्री अनिल कुमार कुन्‍ज, को दोषी ठहराया एवं उन्‍हे 20,000 रू. के जुर्माने के साथ 05 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने विस्‍फोटक पदार्थों के लाइसेन्‍स के अनुमोदन हेतु शिकायतकर्ता से अवैध रिश्‍वत के तौर पर 35,000 रू. की कथित मॉंग के आरोप की शिकायत पर श्री अनिल कुमार कुन्‍ज के विरूद्ध भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया। विस्‍फोटक पदार्थो के विभाग, कोलकाता से लाइसेन्‍स की अनुमति दी गई जिसका आरोपी के द्वारा निरीक्षण किया गया एवं उसके अनुमोदन के लिए लम्बित था। सीबीआई ने जाल बिछाया एवं आरोपी को 35,000 रू. की रिश्‍वत की मॉंग व स्‍वीकार करने के दौरान रंगे हाथ पकड़ा। जॉंच के बाद, आरोपी के विरूद्ध नामित अदालत में आरोप पत्र दायर हुआ।

एक अन्‍य मामले में, सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, रायपुर (छत्‍तीसगढ़) ने गैर अनुपातिक सम्‍पत्ति को रखने के मामले में तत्‍कालीन आयकर अधिकारी, रायपुर श्री दिलीप कुमार दास को 5,00,000 रू. जुर्माने के साथ 03 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने दिनांक 11.05.2011 को आरोपी के विरूद्ध मामला दर्ज किया। आरोपी को शिकायतकर्ता से उसके आयकर मूल्‍यांकन के मामले को निपटाने के लिए 20,000 रू. की रिश्‍वत की मॉंग व स्‍वीकार करने के दौरान सीबीआई के द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया। रिश्‍वत मामले की जॉंच के दौरान, आरोपी के परिसर में तलाशी ली गई जिसमें आपत्तिजनक दस्‍तावेजों के अतिरिक्‍त भारी सम्‍पत्तियॉं बरामद हुई।

सीबीआई जॉंच से पता चला कि श्री दिलीप कुमार दास ने 22.11.2001 से 13.01.2011 की अवधि के दौरान अपनी आय के ज्ञात स्रोतो से लगभग 1,62,64,828 रू. मूल्‍य की गैर अनुपातिक सम्‍पत्ति अर्जित की। गैर अनुपातिक सम्‍पत्ति की प्रतिशत गणना लगभग 488 प्रतिशत की गई। जॉंच के पश्‍चात, सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश की अदालत, रायपुर में आरोपी के विरूद्ध दिनांक 25.05.2012 को आरोप पत्र दायर हुआ।

विचारण अदालत ने दो आरोपियों को कसूरवार पाया एवं अलग-अलग मामलों में उन्‍हे दोषी ठहराया।

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