सीबीआई ने सिंडीकेट बैंक को 102.87 करोड़ रू. (लगभग) की हानि पहुँचाने पर निजी कम्‍पनी के तत्‍कालीन चेयरमैन एवं अन्‍य के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 08.06.2018

सीबीआई ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 201, 409, 420, 468, 471 व 477-ए के तहत चेन्‍नई स्‍थित निजी कम्‍पनी के तत्‍कालीन चेयरमैन ; उक्‍त कम्‍पनी के तत्‍कालीन प्रबन्‍ध निदेशक तथा 23 अन्‍य के विरूद्ध अतिरिक्‍त मुख्‍य महानगर दण्‍डाधिकारी, चेन्‍नई की अदालत में आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने सिण्‍डीकेट बैंक से प्राप्‍त शिकायत के आधार पर चेन्‍नई स्‍थित निजी कम्‍पनी के तत्‍कालीन चेयरमैन तथा अन्‍य के विरूद्ध दिनांक 08.06.2016 को मामला दर्ज किया। ऐसा आरोप था कि उक्‍त चेन्‍नई स्थित कम्‍पनी (पब्लिक लिमिटेड नान बैंकिग फाइनेन्सिल कम्‍पनी ) के सिण्‍डीकेट बैंक, कारपोरेट फाइनेन्‍स ब्रान्‍च, चेन्‍नई के साथ वर्ष 2004 से बैंकिग सम्‍बन्‍ध थे। अकाउण्टिंग डेटा बेस ‘ ओरैकल ’ में रखा गया था जो कि उक्‍त कम्‍पनी को बैक इण्‍ड प्रोसेस के माध्‍यम से इसमें परिवर्तन/ छेड़छाड़ की अनुमति देता था। ऐसा आगे आरोप था कि कम्‍पनी, काल्‍पनिक आय एवं अस्तित्‍वहीन सम्‍पत्ति को दर्शाकर वर्षो से (वर्ष 1998 से) बढ़ी हुई आय के साथ ही साथ बढ़ी हुई सम्‍पत्ति दर्शाती थी। उक्‍त कम्‍पनी के द्वारा अपने क्‍लाइन्‍टों को अनुदान के तौर पर दर्शाए गए ज्‍यादातर ऋण कथित रूप से काल्‍पनिक थे। बैंकों से प्राप्‍त ऋणों को कथित रूप से केवल उक्‍त कम्‍पनी की अंशधारिता को प्राप्‍त करने के लिए तत्‍कालीन प्रबन्‍ध निदेशक के द्वारा नियंत्रित मुखौटा कम्‍पनियों में लगा दिया गया। ऐसा भी आरोप था कि एन.पी.ए. के प्रावधानों को टालने हेतु इन मुखौटा कम्‍पनियों के द्वारा उक्‍त कम्‍पनी की गैर निष्‍पादित परिसम्‍पत्तियों (एन.पी.ए.) को जाली समझौता के माध्‍यम से अपने हाथों में लेना दर्शाया गया जिसके परिणाम स्‍वरूप लाभ बढ़ा चढ़ा (INFLATED) कर पेश किया गया, इस प्रकार, सिण्‍डीकेट बैंक को 102.87 करोड़ रू. (लगभग) की हानि हुई।

जॉंच से पता चला कि उक्‍त आरोपी व्‍यक्तियों ने 07 दूरस्‍थ/ मुखौटा कम्‍पनियों के साथ षड़यंत्र में आगे वैधानिक एवं आंतरिक लेखा परीक्षण के साथ कथित रूप से अनुचित साख सीमाएं प्राप्‍त करने व उक्‍त को बेईमानी से अन्‍य मद में प्रयोग करने के लिए जाली वित्‍तीय विवरणों को पेश कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की जिससे बैंक को 102.87 करोड़ रू. (लगभग) की सदोष पूर्ण हानि हुई। जॉंच से यह भी खुलासा हुआ कि प्रोत्‍साहक निदेशकों ने कथित रूप से, उक्‍त आरोपियों के द्वारा संचालित न्‍यास को वार्षिक तौर पर दान देने के लिए इस तरह की ऋण राशि का प्रयोग कर उन लोगों को सौंपी गई कम्‍पनी की सम्‍पत्तियों का गबन किया।

गहन जॉंच के पश्‍चात, सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधारित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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