सीबीआई ने संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-2, वर्ष 2011 के सम्‍बन्‍ध में 87 आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 08.02.2018

सीबीआई ने व्‍यापम द्वारा दिनांक 19.02.2012 को संविदा शाला शिक्षक पात्रता वर्ग -2, वर्ष 2011  में हुई अनियमितताओं के सम्‍बन्‍ध में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420, 467, 468 एवं 471, भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम,1988 की धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(डी), आई टी अधिनियम की धारा 66 एवं एम.पी.आर.ई. अधिनियम की धारा 4 के साथ पठित धारा 3(डी)(1)(2) के तहत 9 वें ए.एस.जे. भोपाल (मध्‍य प्रदेश) के समक्ष 72 उम्‍मीदवारों, 4 व्‍यापम कर्मियों, 11 प्राइवेट व्‍यक्तियों/ मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों सहित 87 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आज आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने समादेश याचिका (सिविल) संख्‍या 417/ 2015 के साथ अन्‍य विभिन्‍न याचिकाओं में दिनांक 9 जुलाई, 2015 को जारी माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर मामला दर्ज किया एवं आरो‍पी उम्‍मीवारों के नम्‍बरों को अवैध रूप से बढ़ाने के आरोप पर 36 उम्‍मीदवारों ; 07 मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों एवं 04 व्‍यापम कर्मियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा  420, 467, 468, 471, 120-बी, आई टी अधिनियम की धारा 65/66, मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त परीक्षा अधिनियम,1937 की धारा 4/3(डी)(1)(2) के तहत पूर्व में मध्‍य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट संख्‍या 20/2013 की जॉंच को अपने हाथों में लिया। एस.टी.एफ. जॉंच के दौरान, आरोपी व्‍यापम कर्मी के कम्‍प्‍यूटर की हार्ड डिस्‍क में मौजूद फाइलों, जिससे पता चलता है कि कुछ उम्‍मीदवारों के नम्‍बरों को कथित रूप से बढ़ाया गया था ताकि कॉन्‍ट्रैक्‍चुअल स्‍कूल टीचर्स इलिजिबिलिटी टेस्‍ट, 2011 में उन्‍हे पास कराया जा सके, को बरामद किया गया। उक्‍त तथ्‍य को उम्‍मीदवारों की ओ.एम.आर. उत्‍तर पत्रक से सत्‍यापित किया गया और पाया गया कि 73 उम्‍मदवारों के नम्‍बरों को कथित रूप से बढ़ाया गया ताकि उन्‍हें अन्तिम परिणाम में उत्‍तीर्ण करवाया जा सके।

सीबीआई ने उम्‍मीदवारों के चयन से सम्‍बन्धित डिजिटल साक्ष्‍य सहित एवं व्‍यापम के नियंत्रक की नियुक्ति में कथित रूप से हुई अनियमितताओं की गम्‍भीर जॉंच की। ऐसा आरोप था कि उक्‍त व्‍यापम कर्मी का नाम यहॉं तक कि व्‍यापम के नियंत्रक की नियुक्ति हेतु 03 नामों के पैनल में मौजूद नही था। जॉंच के दौरान यह पता चला कि उक्‍त व्‍यापम कर्मी ने बाद में आरोप पत्र में शामिल एक आरोपी के कहने पर कुछ उम्‍मीदवारों की अवैध चयन की व्‍यवस्‍था की।

जॉंच से आगे पता चला कि लोक सेवक एवं अन्‍य प्राइवेट व्‍यक्तियों ने कथित रूप से उम्‍मीदवारों के परीक्षा विवरण यथा अनुक्रमांक संख्‍या, फार्म संख्‍या आदि एकत्र किया और व्‍यापम के प्रिंसपल सिस्‍टम एनालिस्‍ट के द्वारा प्राप्‍त परीक्षा विवरणों को कथित रूप से कम्‍प्‍यूटर की डिजिटल फाइल में अंकित कर दिया, जिसमें उम्‍मीदवारों के साथ ही साथ उनके नामों/ अनुक्रमांकों तथा मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों के नाम जो कि उम्‍मीदवारों के संरक्षक थे, का विवरण मौजूद था। परिणाम की घोषणा के ठीक पहले, तत्‍कालीन प्रिंसपल सिस्‍टम एनालिस्‍ट ने, ऐसे उम्‍मीदवारों, जिनका नम्‍बर बढ़ाना जाना था, के सन्‍दर्भ में एक अन्‍य डेटाबेस में उसने कथित रूप से उम्‍मीदवारों की आवश्‍यकता के अनुसार नम्‍बर बढ़ा दिए ताकि वे परीक्षा पास कर सके तथा उसके पश्‍चात 73 आरोपी उम्‍मीदवारों के द्वारा प्राप्‍त नम्‍बरों को वास्‍तविक परिणाम से मिटा दिया गया। डेटाबेस से बढ़े हुए नम्‍बरों के साथ उम्‍मीदवारों के विवरणों को परिणाम वाली फाइल के अन्‍त में जोड़ दिया गया। ऐसा भी आरोप था कि उनके द्वारा ओ.एम.आर. सीट्स, जिसमें आरोपी उम्‍मीदवारों के द्वारा प्राप्‍त वास्‍तविक नम्‍बर, जो कि घोषित परिणाम में प्राप्‍त नम्‍बरों से कम थे, में तथाकथित कोई परिवर्तन नही किया जा सका।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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