सीबीआई ने 665 करोड़ रू. (लगभग) की धोखाधड़ी के मामलों में तीन आरोप पत्र दायर किए

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 22.12.2017

सीबीआई ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 201, 409, 420, 471 एवं 477-ए के तहत दण्‍डनीय अपराधों हेतु प्राइवेट लीजिंग कम्‍पनी के तत्‍कालीन चेयरमैन और प्रबन्‍ध निदेशक तथा अन्‍यों के विरूद्ध अतिरिक्‍त मुख्‍य महानगर दण्‍डाधिकारी की अदालत में तीन आरोप पत्र दायर किए। आरोपियों ने तीन बैंकों के साथ कथित रूप से 665 करोड़ रू. (लगभग) की धोखाधड़ी की।

ऐसा आरोप था कि एफ. एल.सी.आई.एल. के निदेशकों/ प्रोत्‍साहकों/ प्रबन्‍ध निदेशक एवं प्रमुख कर्मियों ने आपराधिक षड़यंत्र में आगे, कम्‍पनी के वैधानिक एवं आन्‍तरिक लेखाकारों और अन्‍य अज्ञातों के साथ मिलकर आई.डी.बी.आई. बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के लिए दुर्भानापूर्व उद्देश्‍य से जाली वित्‍तीय रिपोर्टों के आधार पर आई.डी.बी.आई. बैंक से विभिन्‍न साख सुविधाऍं प्राप्‍त की और कई प्रकार के अन्‍य/ व्‍यक्तिगत उद्देश्‍यों के लिए उक्‍त सुविधाओं का प्रयोग कर गबन किया एवं इस प्रकार, बैंक को 273.99 करोड़ रू. (लगभग) की सदोषपूर्ण हानि हुई। इसी प्रकार से, आरोपियों ने झूठी एवं बनावटी वित्‍तीय विवरणों को पेश कर चेन्‍नई की प्राइवेट लीजिंग कम्‍पनी के नाम पर कार्यशील पूँजी सीमा और अल्‍पकालिक ऋणों के रूप में यूको बैंक से विभिन्‍न साख सुविधाऍं प्राप्‍त की तथा कई प्रकार के अन्‍य/व्‍यक्तिगत उद्देश्‍यों के लिए उक्‍त सुविधाओं का प्रयोग कर गबन किया और इस प्रकार, बैंक को 142.94 करोड़ रू. (लगभग) की सदोषपूर्ण हानि हुई। आरोपियों ने वर्ष 1998 से खाता बुक में निराधार इन्‍ट्री के द्वारा वित्‍तीय विवरणों में बढ़ा चढ़ कर आय एवं सम्‍पत्तियों को पेश कर चेन्‍नई की प्राइवेट कम्‍पनी के नाम पर एस.बी.आई. से विभिन्‍न साख सुविधाऍं भी प्राप्‍त की और कई प्रकार के अन्‍य/ व्‍यक्तिगत उद्देश्‍यों के लिए उक्‍त सुविधाओं का प्रयोग कर गबन किया और इस प्रकार, बैंक को 248.46 करोड़ रू. (लगभग) को सदोषपूर्ण हानि हुई।

सीबीआई की जाँच से पता चला कि आरोपियों ने 7 अनुचर (सैटेलाइट)/ मुखौटा कम्‍पनियों के साथ आपराधिक षड़यंत्र कर, वैधानिक एवं आन्‍तरिक लेखाकारों के साथ मिलकर अनुचित साख सीमा को प्राप्‍त करने के लिए जाली वित्‍तीय विवरणों को पेश कर बैंकों के साथ धोखाधड़ी की और उक्‍त सुविधाओं का प्रयोग अन्‍य मद में प्रयोग कर बैंकों को 665 करोड़ रू. (लगभग) की सदोषपूर्ण हानि पहुँचाई। जॉंच से यह भी पता चला कि प्रोत्‍साहक-निदेशकों ने स्‍वम् के द्वारा देख रेख वाली कम्‍पनी की सम्‍पत्तियों का इस तरह की ऋण राशि को वार्षिक रूप से एक न्‍यास (मुख्‍य अभियुक्‍त द्वारा संचालित) को दान में देने हेतु प्रयोग कर गबन किया।

 

 

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