अलग-अलग मामलों में तीन बैंक कर्मियों एवं दो अन्‍य को तीन से पाँच वर्ष की कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 01.12.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, अहमदाबाद (गुजरात) ने स्‍टॅाक इन्‍वेस्‍ट डिपार्टमेन्‍ट, सेन्‍ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया, अहमदाबाद के तत्‍कालीन प्रभारी अधिकारी श्री भाष्‍कर वी. मेहता ; पंजाब नेशनल बैंक, मस्‍कटी मार्केट शाखा, अहमदाबाद के तत्‍कानलीन अधिकारी श्री सी.पी. गोहिल एवं दो प्राइवेट व्‍यक्ति-श्री गौरग एस. शाह एवं मनीष जे. वैद्य को भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467 एवं 511 के तहत प्रत्‍येक पर 10,000 रू. जुर्माने सहित 03 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने सेन्‍ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया से प्राप्‍त शिकायत के आधार पर स्‍टॅाक इन्‍वेस्‍ट डिपार्टमेन्‍ट, सेन्‍ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया, अहमदाबाद के प्रभारी अधिकारी श्री भाष्‍कर वी. मेहता एवं अन्‍य के विरूद्ध मामला दर्ज किया। ऐसा आरोप था कि श्री भाष्‍कर वी मेहता ने अन्‍य आरोपी व्‍यक्तियों के साथ षड़यंत्र में स्‍टॅाक इन्‍वेस्‍टमेन्‍ट इन्‍स्‍ट्रूमेन्‍ट्स में धनराशि की हेर-फेर की एवं सेन्‍ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया के साथ 9.2 करोड़ रू. (लगभग) की धोखाधड़ी करने के कोशिश की। हालांकि इस प्रयास का पता चल गया एवं शिकायत दर्ज की गई।

जॉंच के पश्‍चात, अहमदाबाद की नामित अदालत में आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 120-बी, 420, के साथ पठित धारा 511, 467 एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(डी) के तहत दिनांक 27.02.1998 को आरोप पत्र दायर हुआ। विचारण अदालत ने आरोपी व्‍यक्तियों को कसूरवार पाया एवं उन्‍हें दोषी ठहराया।

एक अन्‍य मामले में, सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, अहमदाबाद (गुजरात) ने स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के तत्‍कालीन उप-प्रबन्‍धक (एडवान्‍सेज) श्री वासुदेव राव को 5,000 रू. जुर्माने सहित 05 वर्ष की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के तत्‍कालीन उप-प्रबन्‍धक (एडवान्‍सेज) श्री वासुदेव राव एवं अन्‍य के विरूद्ध मामला दर्ज किया। श्री वासुदेव, वर्ष 1998-99 के दौरान आपराधिक षड़यंत्र में शामिल हुए एवं अपनी विवेकाधीन शाक्तियों से परे, जाली बिलों एवं छेड़छाड़ युक्‍त व झूठे बैंक खातों के आधार पर प्राइवेट व्‍यकियों को विभिन्‍न क्रेडिट सुविधाऍं जारी कर दी। स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद को 2,76,177 रू. की हानि हुई।

अहमदाबाद की नामित अदालत में आरोपी के विरूद्ध दिनांक 30.06.2003 को आरोप पत्र दायर हुआ। विचारण अदालत ने आरोपी व्‍यक्ति को कसूरवार पाया एवं उन्‍हें दोषी ठहराया।

 

 

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