सीबीआई ने व्‍यापम द्वारा आयोजित पी.एम.टी.-2012 परीक्षा में की गई कथित अनियमितताओं के सम्‍बन्‍ध में 592 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 23.11.2017

सीबीआई ने भोपाल की नामित अदालत में 04 व्‍यापम कर्मियों ; 03 प्राइवेट व्‍यक्तियों/ रैकेट संचालको ; 22 मध्‍यस्‍थों ; 334 समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वरों) व लाभार्थी उम्‍मीदवारों ; 155 लाभार्थी उम्‍मीदवारों के अभिभावकों ; 46 निरीक्षकों ; तत्‍कालीन निदेशक सहित चिकित्‍सा शिक्षा संकाय, मध्‍य प्रदेश के 02 तत्‍कालीन अधिकारियों तथा भोपाल एवं इन्‍दौर स्थित 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों के 26 कर्मियों जिनमें उक्‍त मेडिकल कालेज के चेयरमैन शामिल है, सहित 592 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया।

माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की समादेश याचिका (सिविल) संख्‍या 417/2015 के साथ-साथ अन्‍य विभिन्‍न याचिकाओं में दिनांक 09.07.2015 को जारी आदेश के द्वारा व्‍यापम घोटाला मामले की जॉंच को सीबीआई को सौंपा, इसी आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया। मध्‍य प्रदेश व्‍यवसायिक परीक्षा मंडल (व्‍यापम) द्वारा आयोजित प्री. मेडीकल टेस्‍ट-2012 में हुई अनियमितताओं के सम्‍बन्‍ध में व्‍यापम के 04 कर्मियों सहित 11 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 65/66, मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त अधिनियम, 1937 की धारा 4/3(डी) 1, (2) के तहत एस.टी.एफ., भोपाल द्वारा पूर्व मे दर्ज प्राथमिक सूचना रिर्पोट 12/2013 की जॉंच को सीबीआई ने अपने हाथों में लिया।

जाँच के दौरान, ऐसा ज्ञात हुआ कि कुछ रैकेट संचालकों ने अपने सहपराधियों के साथ मिलकर कथित रूप से उक्‍त परीक्षा में लाभार्थी उम्‍मीदवारों के लिए समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वरों) की व्‍यवस्‍था कर रहे थे। सम्‍बन्धित सॉल्‍वरों एवं लाभार्थी उम्‍मीदवारों की जोडि़यॉं, व्‍यापम कर्मियों के माध्‍यम से छेड़छाड़ कर इन समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वरों)-लाभार्थी उम्‍मीदवारों के रोल नम्‍बर प्राप्‍त कर करते थे। जिससे लाभार्थी उम्‍मीदवार अपने साल्‍वर उम्‍मीदवार के ठीक पीछे बैठ कर साल्‍वर उम्‍मीदवार के उत्‍तरों को नकल करने में सफल हो जाता था। सीबीआई जॉंच ने चिकित्‍सा शिक्षा संकाय, मध्‍य प्रदेश सरकार के लोक सेवकों की सहपराधिता सहित भोपाल एवं इन्‍दौर स्थित 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों की कालेज स्‍तर की प्रवेश समिति के साथ ही साथ प्रबन्‍धन की भी आगे की साजिश का खुलासा किया।

ऐसा आगे आरोप था कि व्‍यापम के द्वारा दिनांक 10, जून, 2012 को परीक्षा आयोजित की गई एवं इसके पश्‍चात, सफल उम्‍मीदवारों को विभिन्‍न मेडिकल कालेजों में काउंसलिंग और आवंटन के लिए निदेशक, चिकित्‍सा शिक्षा, मध्‍य प्रदेश सरकार को परीक्षा परीणाम भेजा गया जो कि 17.07.2012 से प्रारम्‍भ होने थे। पहले चरण के लिए काउंसलिंग एवं आनलाइन सीट आवंटन को आयोजित करने के लिए डी.एम.ई. ने एम.पी. आन लाइन लिमिटेड को अनुबन्धित किया जबकि दुसरे चरण की काउं‍सलिंग, जो कि सीमित संख्‍या में खाली सीटों के विरूद्ध प्रवेश हेतु हुई, यह ऑफ लाइन हुई तथा यह दिनाक 20.09.2012 से दिनांक 25.09.2012 के मध्‍य हुई। पी.एम.टी.-2012 परिणाम घोषित होने के बाद, समाधानकर्ताओं (साल्‍वरों) को 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों के आरोपी कर्मियों के साथ षड़यंत्र में मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों/ रैकेट संचालकों के द्वारा पी.एम.टी.-2012 हेतु काउंसलिंग के दौरान इन चार कालेजों की सीटों को चुनने के लिए उकसाया गया। चूकि इन समाधानकर्ता उम्‍मीदवारों ने परीक्षा में उच्‍च रैंक प्राप्‍त की थी यही कारण है कि काउंसलिंग के दौरान इन लोगों को इन मेडिकल कालेजों में आसानी से आवंटन मिल गया। ऐसा भी आरोप था कि 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों में राज्‍य के कोटे से इन समाधानकर्ता उम्‍मीदवारों को एम.बी.बी.एस. सीट पर आवंटन मिलने के बाद, इन उम्‍मीदवरों ने इन कालेजों में वास्‍तव में प्रवेश नही लिया। इन 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों के कालेज प्रशासन एवं कालेज प्रवेश समिति ने कथित रूप से डी.एम.ई. को झूठी जानकारी दी कि इन छात्रों ने कालेज में प्रवेश ले लिया है। यह स्‍टेट कोटे की सीटों को रोकने के लिए किया गया ताकि सफल उम्‍मीदवार जो कि आगे की प्रतीक्षा सूची में थे, की आगे की काउंसलिंग न हो पाए। समाधानकर्ता छात्रों जिन्‍हे काउंसलिंग के पश्‍चात, ये 04 प्राइवेट मेडिकल कालेज आवंटित थे, को कथित रूप से मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों के माध्‍यम से सीटो को खाली करने के लिए मौद्रिक भुगतान किया गया। इसके पश्‍चात, इन प्राइवेट मेडिकल कालेज के प्राधिकारियों ने नियत प्रक्रिया के पालन के बिना ही दिनांक 28 से 30.09.2012 के मध्‍य अपनी पसन्‍द के छात्रों का प्रवेश ले लिया। प्रवेश लेने वाले ज्‍यादातर छात्रों ने यहॉं तक कि पी.एम.टी. परीक्षा भी नही दी थी। डी.एम.ई., इन प्राइवेट कालेजों से सहमत थी एवं इन प्राइवेट कालेजों के द्वारा दी जा रही सूचना की पुर्नजाँच भी कभी नही की तथा इसके विपरीत, इन कालेजों में स्‍टेट कोटा सीटों के विरूद्ध अवैध प्रवेश को वैध करने में इन्‍हें सहायता व छूट दी। डी.एम.ई. ने सम्‍बन्धित विश्‍वविधालयों, जहॉं से प्राइवेट मेडिकल कालेज सम्‍बद्ध थे, को अवैध रूप से प्रवेशित छात्रों के नामों को नामांकन के लिए अग्रसारित किया।

ऐसा आगे आरोप था कि प्रथम चरण अर्थात पी.एम.टी.-2012 हेतु आवेदन फार्म भरने से लेकर प्रवेश तक, समाधानकर्ता उम्‍मीदवारों (सॉल्‍वरों) को 04 प्राइवेट मेडिकल कालेजों के द्वारा कपटपूर्ण तरीके से सूचना दी गई एवं लगभग सभी मध्‍यवर्ती चरणों में आरोपी व्‍यक्तियों ने आपराधिक षड़यंत्र के समर्थन में कार्य किया। समाधानकर्ता उम्‍मीदवारो (सॉल्‍वरों) के आवेदन पत्रो को आरोपी मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों के द्वारा पता, मोबाइल नम्‍बर, ई-मेल आई डी आदि झूठे सामान्‍य विवरणों को पेश कर भरा गया ; समाधानकर्ता की फीस का भुगतान किआस्‍क/ साइबर कैफे के माध्‍यम से मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों के द्वारा किया गया ; आरोपी समाधानकर्ता उम्‍मीदवार (साल्‍वर) परीक्षा वाले शहरों में मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों की सहायता से रूके एवं लाभार्थी उम्‍मीदवारों के साथ पी.एम.टी.-2012 परीक्षा में शामिल हुए।

जब सीबीआई ने इस मामले की जॉंच को अपने हाथों में लिया तब 145 आरोपी व्‍यक्तियों की या तो पहचान नही हुई थी या लापता थे। इस तरह के ज्‍यादातर आरोपी व्‍यक्ति समाधानकर्ता उम्‍मीदवार (सॉल्‍वर) थे जो कि आरोपी मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों के साथ मिलीभगत में अपने आवेदन पत्रों पर गलत पते दिए थे, इस प्रकार ये लोग लापता थे। इस तरह के व्‍यक्तियों की उपलब्‍ध कोई अन्‍य विवरणों के बिना उनके नामों एवं फोटो की पहचान करना सीबीआई के लिए असाधारण कार्य था। इन आरोपी व्‍यक्तियों की पहचान के लिए सीबीआई ने विभिन्‍न नवीन तकनीकों का प्रयोग किया। जॉंच की अवधि के दौरान, सीबीआई ने पाया कि इस तरह के समाधानकर्ता उम्‍मीदवार (सॉल्‍वर) मेडिकल कालेज के छात्रों या मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश, बिहार, दिल्‍ली, राजस्‍थान, झारखण्‍ड, पश्चिम बंगाल व महाराष्‍ट्र राज्‍यों में कोचिंग लेने वाले तेज तर्रार मेडिकल के आकांक्षी थे। कठिन प्रयास के बाद, सीबीआई ने विभिन्‍न मेडिकल कालेजों एवं इन सभी राज्‍यों में फैले कोचिंग संस्‍थानों के छात्रों से सम्‍बन्धित विवरण जुटाए और इस तरह के छात्रों का 10 लाख (लगभग) से भी ज्‍यादा का डेटाबेस तैयार करने में सफलता प्राप्‍त की।

सीबीआई ने दो अन्‍य कर्मियों जो कि एम.बी.बी.एस. में प्रवेश हेतु काउंसलिंग के सम्‍बन्‍ध में माननीय अदालत के निर्देशों की अवमानना के लिए जिम्‍मेदार थे, की भूमिका का भी पता लगाया एवं उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्‍तुति की।

इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

सीबीआई ने पूर्व में व्‍यापम मामलों, भोपाल के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत में व्‍यापम द्वारा आयोजित पी.एम.टी.-2013 परीक्षा में कथित अनियमितताओं से सम्‍बन्धित मामले में 490 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध दिनांक 31.10.2017 को आरोप पत्र किया।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

 

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