सीबीआई ने वी.वी.आई.पी. हेलिकाप्‍टरों की खरीद से सम्‍बन्धित मामले में आगे की जॉंच के दौरान तलाशी ली

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 02.11.2017

सीबीआई ने अगस्‍ता वेस्‍टलैण्‍ड से वी.वी.आई.पी. हेलिकाप्‍टरों की खरीद से सम्‍बन्धित मामले में आगे की जारी जॉंच के क्रम में दिल्‍ली में 03 स्‍थानों एवं कोलकाता में 03 स्‍थानों पर तलाशी ली जिसमें दिल्‍ली स्थित प्राइवेट फर्म के प्रबन्‍ध निदेशक के आवास एवं कार्यालय ; कोलकाता स्थित एक अन्‍य प्राइवेट फर्म के निदेशक के कार्यालय एवं आवास तथा कोलकाता में उनके नजदीकी सहायक के आवास शामिल हैं। तलाशी के दौरान, दिल्‍ली स्थित प्राइवेट फर्म के प्रबन्‍ध निदेशक के आवास से 55.68 लाख रू. (लगभग) एवं कोलकाता की एक अन्‍य प्राइवेट फर्म के निदेशक के आवास से 29 लाख रू. (लगभग) की भारतीय मुद्रा बरामद हुई। तलाशी के दौरान बरामद आपत्तिजनक दस्‍तावेजों की भी जॉंच पड़ताल की जा रही है। कोलकाता एवं दिल्‍ली के आरोपियों के लॉंकर से सम्‍बन्धित तलाशी जारी है। उक्‍त आरोपियों ने कथित रूप से नकद में प्राप्‍त काली कमाई को मुखौटा कम्‍पनियों के माध्‍यम से सफेद कर दिया है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420 एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा, 1988 की धारा 7, 8, 9, 12 व 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(डी) के तहत तत्‍कालीन वायुसेना प्रमुख एवं 18 अन्‍य आरोपी व्‍यक्तियों/ कम्‍पनियों के विरूद्ध मामला दर्ज हुआ। मामले में दिनांक 01.09.2017 को आरोप पत्र दायर हुआ एवं आगे की जॉंच प्रक्रिया में है।

ऐसा आरोप था कि तत्‍कालीन वायु सेना प्रमुख (सी.ए.एस.) ने अन्‍य आरोपी व्‍यक्तियों के साथ मिलकर षड़यंत्र किया एवं आई.ए.एफ. के नियत मानक जिस में वी.पी.आई.पी. हेलिकाप्‍टरों के लिए 6000 मीटर्स की सर्विस सिलिंग एक अनिवार्य परिचालन आवश्‍यकता है, को परिवर्तित कर 4500 मीटर्स करना स्‍वीकार किया। ऐसा भी आरोप था कि सर्विस सिलिंग में कमी के अतिरिक्‍त, कम से कम 1.8 मीटर की कैबिन की ऊचाई के साथ एक नई परिचालन आवश्‍यकता (ओ.आर.) को पहली बार शामिल किया गया। ऐसा आगे आरोप है कि कई इन्‍जनों के सन्‍दर्भ में परिचालन आवश्‍यकता (ओ.आर.) बिना किसी निर्धारित कारण के ‘कम से कम’ ‘दो इन्‍जन’ में परिवर्तित कर दी गई।

जॉंच से पता चला कि अन्‍य आरोपियों, जिन्‍होने सम्‍बन्धित लोक सेवकों पर प्रभाव डालने के लिए अवैध रिश्‍वत स्‍वीकार किया, सहित मध्‍यस्‍थ/ रिश्‍तेदारों के द्वारा आरोपी विक्रेताओं से अवैध रिश्‍वत स्‍वीकार कर कथित रूप से मैसर्स ए.डब्‍ल्‍यू.आई.एल. के प्रति अनुचित पक्षपात दर्शाया।

आगे की जॉंच जारी है।

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