सीबीआई ने व्‍यापम द्वारा आयोजित पी.एम.टी.-2013 परीक्षा में की गई कथित अनियमितताओं के सम्‍बन्‍ध में 490 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया एवं सीबीआई को राज्‍य पुलिस द्वारा जब्‍त की गई हार्ड डिस्‍क में छेड़छाड़ के कोई प्रमाण नही मिले

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 31.10.2017

सीबीआई ने व्‍यापम द्वारा आयोजित पी.एम.टी. 2013 परीक्षा में कथित अतियमितताओं से सम्‍बन्धित जारी जॉंच में 03 व्‍यापम कर्मियों, 03 रैकेट संचालकों, 17 मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों, 297 समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वर) एवं लाभार्थी उम्‍मीदवारों और लाभार्थी उम्‍मीवारों के 170 अभिभावकों सहित 490 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध व्‍यापम मामलों के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत, भोपाल में आरोप पत्र दायर किया। आरोप पत्र में, मध्‍य प्रदेश पुलिस द्वारा जब्‍त की गई हार्ड डिस्‍क ड्राइव (एच.डी.डी.) के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोपो पर अपने जॉंच परिणाम को भी पेश किया जो कि जॉंच के दौरान एकत्र की गई सी.एफ.एस.एल. की रिर्पोट और अन्‍य प्रमाणों पर आधारित है। सीबीआई ने निष्‍कर्ष दिया कि एच.डी.डी. के साथ कोई छेड़छाड़ नही की गई।

माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने समादेश याचिका (सिविल) संख्‍या 417/2015 के साथ-साथ अन्‍य विभिन्‍न याचिकाओं में दिनांक 09 जलाई, 2015 को जारी आदेश के द्वारा व्‍यापम घोटाला मामले की जॉंच, सीबीआई को सौपी। उक्‍त आदेशों के अनुसरण में, सीबीआई ने मामला दर्ज किया तथा मध्‍य प्रदेश व्‍यवसायिक परीक्षा मंडल (व्‍यापम) द्वारा आयोजित प्री. मेडिकल टेस्‍ट, 2013 में हुई अनियमितताओं के सम्‍बन्‍ध में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419, 420, 467 एवं 468 के तहत राजेन्‍द्र नगर पुलिस स्‍टेशन, इन्‍दौर में दर्ज प्राधमिक सूचना रिर्पोट संख्‍या 539/2013 की जॉंच को अपने हाथों में लिया। जॉंच के दौरान, कुछ रैकेट संचालकों, समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वर), लाभार्थी उम्‍मीदवारों तथा कुछ अन्‍यों के नाम सामने आये, जो कि इस कार्य को भोपाल, इन्‍दौर उज्‍जैन, शहडोल, रतलाम व सागर आदि जगहों से संचालित रहे थे। ऐसा आरोप था कि ये रैकेट संचालक, लाभार्थी उम्‍मीदवारों एवं समाधानकर्ताओं (साल्‍वरों) की व्‍यवस्‍था करने में संलिप्‍त थे। सम्‍बन्धित सॉल्‍वरों एवं लाभार्थी उम्‍मीदवारों की जोडि़यॉं रैकेट संचालकों के द्वारा बनाई जा रही थी। ऐसा भी आरोप था कि इसके पश्‍चात, रैकेट संचालक, व्‍यापम कर्मियों के माध्‍यम से छेड़छाड़ कर इन समाधानकर्ताओं (सॉल्‍वरों)-लाभार्थी उम्‍मीदवारों के रोल नम्‍बर प्राप्‍त करते थे जिसमें लाभार्थी उम्‍मीवार अपने साल्‍वर उम्‍म्‍ीदवार के ठीक पीछे बैठता था, इस प्रकार लाभार्थी, साल्‍वर उम्‍मीदवार के उत्‍तरों को नकल करने में सफल हो जाता था।

जब सीबीआई के द्वारा मामले को अपने हाथ में लिया गया तब तक कई आरोपी व्‍यक्ति, जो कि अब तक लापता थे, क्‍योंकि पी.एम.टी.-2013 हेतु प्राप्‍त उनके आवेदन पर उन्‍होने गलत पता दिया था या उस पते पर नही रह रहे थे। जॉंच के दौरान, सीबीआई ने पाया कि ये समाधानकर्ता (साल्‍वर), मेडिकल कालेज के छात्र या मध्‍य प्रदेश,उत्‍तर प्रदेश, बिहार, दिल्‍ली, राजस्‍थान राज्‍यों एवं मध्‍य प्रदेश से सटे महाराष्‍ट्र के जिलों के ऐसे तेजतर्रार उम्‍मीदवार थे जो कि मेडिकल की कोचिंग ले रहे थे, में शामिल थे। सीबीआई ने उक्‍त राज्‍यों में फैले विभिन्‍न मेडिकल कालेजों एवं कोचिंग संस्‍थानों के छात्रों का उचित विवरण एकत्र किया एवं इस तरह के 10 लाख छात्रों से भी अधिक का डाटा बेस तैयार करने में सफलता प्राप्‍त की। नवीनतम फोरेन्सिक सॉफ्टवेयर एवं उक्‍त डेटाबेस की सहायता से, सीबीआई, 42 आरोपी सॉल्‍वर उम्‍मीदवारों को चिन्हित एवं पता लगा पायी। अन्‍य नवीनतम विधियों का प्रयोग कर, सीबीआई, 11 मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों का पता लगाने में सक्षम हुई व उन्‍हे जॉंच में शामिल किया।

सीबीआई ने वर्तमान मामले में जब्‍त एच.डी.डी. के साथ छेड़छाड़ के सम्‍बन्‍ध में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के सक्षम दायर समादेश याचिका (सिविल) संख्‍या 417/2015 एवं 418/2015 में मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री एवं अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपो पर भी जॉंच की। इन दोनों व्‍यक्तियों ने आरोप लगाया था कि राजेन्‍द्र नगर पुलिस स्‍टेशन, इन्‍दौर में अपराध संख्‍या 539/2013 में दिनांक 18.07.2013 को तत्‍कालीन प्रिन्‍सपल सिस्‍टम एैनालिस्‍ट, व्‍यापम के कम्‍प्‍यूटर से इन्‍दौर पुलिस द्वारा जब्‍त हार्ड डिस्‍क के साथ छेड़छाड़ हुई है।

जॉच के दौरान, जब्‍त विवादित एच.डी.डी. के साथ दो अन्‍य एच.डी.डी. की छायाप्रति, जो कि विचारण अदालत की अभिरक्षा में थी, को सेन्‍ट्रल फोरेन्सिक साइन्‍स लैबोरैटरी (सी.एफ.एस.एल.), हैदराबाद के विशेषज्ञों के माध्‍यम से तैयार किया गया एवं विश्‍लेषण और परीक्षण के लिए सी.एफ.एस.एल. को भेजा गया। 02 पेन ड्राइब्‍स (pen drives), जिनमें से एक पेन ड्राइब्‍स प्राइवेट व्‍यक्ति के द्वारा दायर समादेश याचिका संख्‍या 334/15 के तहत माननीय दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय की अभिरक्षा में रखी गई है तथा दूसरी पेन ड्राइब्‍स सीबीआई के पास बन्‍द लिफाफे में जमा की गई, को भी सी.एफ.एस.एल., हैदराबाद में विश्‍लेषण के लिए भेजा गया। उक्‍त प्राइवेट व्‍यक्ति के दावों के अनुसार पेन ड्राइब्‍स में एक्‍सल फाइल, छेड़छाड़ रहित एवं छेड़छाड़ सहित संस्‍करण में मौजूद है। सी.एफ.एस.एल. ने इन एच.डी.डी. एवं 02 पेन ड्राइब्‍स का परीक्षण किया और सीबीआई को 07 रिर्पोटें पेश की।

सी.एफ.एस.एल. की रिर्पोट के अनुसार, विवादित एच.डी.डी. वाला कम्‍प्‍यूटर अन्तिम कर दिनांक 15.07.2013 को बन्‍द किया गया था एवं दिनांक 15.07.2013 के बाद उक्‍त एच.डी.डी. से किसी भी फाइल को एक्‍सेस नही किया गया था। सी.एफ.एस.एल. की रिर्पोट के अनुसार, उक्‍त प्राइवेट व्‍यक्ति के द्वारा समादेश याचिका (क्रिमिनल) संख्‍या 334/2015 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय, दिल्‍ली से साथ ही साथ सीबीआई को उपलब्‍ध करायी गई पेन ड्राइब्‍स में पॉंच एक्‍सल सीटें जिनमें मुख्‍यमंत्री का सन्‍दर्भ था, को दिनांक 18.07.2013 को बनाया गया था जबकि कथित विवादित एच.डी.डी., सी.एफ.एस.एल. रिर्पोट के अनुसार दिनांक 15.07.2013 को अन्तिम बार बन्‍द हुई थी। उक्‍त प्राइेट व्‍यक्ति के द्वारा माननीय दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के साथ ही साथ सीबीआई को प्रदान की गई पेन ड्राइब्‍स में जाली दस्‍तावेज थे एवं विवादित एच.डी.डी. की जब्‍ती के बाद बनाए गए थे। आरोप में यह सत्‍य नही है कि दिनांक 18.07.2013 को तत्‍कालीन प्रिन्‍सपल सिस्‍टम एनालिस्‍ट, व्‍यापम के कार्यालय से जब्‍त एच.डी.डी. के साथ छेड़छाड़ किया गया था।

सीबीआई ने माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय में उक्‍त हार्ड डिस्‍क में कथित छेड़छाड़ की जॉंच में मिले साक्ष्‍यों पर प्रगति रिर्पोट पेश की।

गहन जॉंच के पश्‍चात, आज एक आरोप पत्र दायर किया गया। अन्‍य 12 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र को सम्‍बन्धित किशोर न्‍यायालय में भी पेश किया जा रहा है।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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