केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो तथा इसकी भूमिकाएं

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, कार्मिक विभाग, कार्मिक पेंशन तथा लोक शिकायत मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत भारत में प्रधान अन्वेषण पुलिस एजेन्सी है। लोक जीवन में मूल्यों के रक्षण एवं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाये रखने में यह एक उत्कृष्ट भूमिका निभा रहा है। भारत में यह नोडल पुलिस एजेन्सी भी है जो कि इन्टरपोल के सदस्य-राष्ट्रों के अन्वेषण का समन्वयन करता है।

वर्षों से के.अ.ब्यूरो ने व्यावसायिकता तथा सत्यनिष्ठा की धारणा को निर्मित किया है। देश के सभी प्रमुख अन्वेषणों में इसके अन्वेषण अधिकारियों की सेवाएं ली जाती है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, संसद तथा जन सामान्य के द्वारा एक संस्था के रूप में के.अ.ब्यूरो को उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त है। अंर्तराज्यीय तथा अंर्तराष्ट्रीय निहितार्थों से (प्रशाखन) युक्त सभी प्रमुख अपराधों का अन्वेषण के.अ.ब्यूरो को करना होता है। आपराधिक आसूचना के एकत्रण से संबंधित तीन प्रमुख क्षेत्रों, यथा, भ्रष्टाचार निरोधक, आर्थिक अपराध तथा विशिष्ट अपराध में भी यह शामिल है।

के.अ.ब्यूरो की अपराध निरोधक प्रभाग मुख्य मंत्रियों, मंत्रियों शासन सचिवों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, बैंकों वित्तीय संस्थानों तथा लोक उद्यम क्षेत्रों के सी.एम.डी. के विरूद्ध मामलों को संभालता है। के.अ.ब्यूरो के अन्वेषणों का राष्ट्र के राजनीतिक तथा आर्थिक जीवन पर अत्याधिक प्रभाव है। के.अ.ब्यूरो द्वारा आपराधिक मामलों की निम्नलिखित विस्तृत वर्गीकरण को संभाला जाता है।
  1. सभी केन्द्र सरकार के विभागों, केंद्रीय लोक उद्यम क्षेत्रों तथा केन्द्रीय वित्तीय संस्थानों के लोक सेवकों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार तथा धोखाधड़ी के मामले।
  2. आर्थिक अपराध, जिसमें बैंकिंग धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, आयात निर्यात एवं विदेशी विनिमय उल्लंघन, मादक पदार्थों, पुरातनिक, सांस्कृतिक संपत्तियों की बड़े पैमाने पर तस्करी तथा अन्य निषिद्ध वस्तुओं की तस्करी इत्यादि। विशिष्ट अपराध, जैसे आतंकवाद, बम विस्फोट, सनसनीखेज नरहत्या, फिरौती के लिए अपहरण तथा माफिया/अंडरवर्ल्ड द्वारा किए गए अपराध।
  3. विशिष्ट अपराध, जैसे आतंकवाद, बम विस्फोट, सनसनीखेज नरहत्या, फिरौती के लिए अपहरण तथा माफिया/अंडरवर्ल्ड द्वारा किए गए अपराध।
के.अ.ब्यूरो का मुखिया एक निदेशक है। के.अ.ब्यूरो में पुलिस रैंक के अन्य अधिकारी विशेष निदेशक/अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, निरीक्षक, उप-निरीक्षक, सहायक उप-निरीक्षक, प्रधान सिपाही तथा सिपाही है। सभी रैंकों की कुल स्वीकृत पुलिस संख्या 4078 है। प्रशासनिक स्टॉफ की कुल स्वीकृत संख्या 1284 है।

इसके अलावा, के.अ.ब्यूरो में विधि अधिकारियों की 230, 155 तकनीकी पद, 144 समूह घ के पद तथा 64 विभागीय कैंटीन स्टॉफ तथा सी.एफ.एस.एल. के 171 वैज्ञानिकों के पदों की स्वीकृति है।
वर्ष 2005-06 की अनुमानित बजट निम्नवत है (रुपए हजार में)
योजना रु. 21000
गैर-योजनारु. 1152800
पूंजीरु. 700

के.अ.ब्यूरो का अधीक्षण

सी.वी.सी. अधिनियम दिनांक 12.09.2003 की अधिसूचना के अनुसार, के.अ.ब्यूरो का अधीक्षण, जहां तक भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के अंतर्गत किए गए अपराध के अन्वेषण से संबंधित है, केन्द्रीय सतर्कता आयोग में निहित है।

क्षेत्राधिकार

शक्तियां विशेषाधिकार तथा दायित्व

के.अ.ब्यूरो की अन्वेषण संबंधी विधिक शक्तियां दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना, 1946 से व्यूत्पन्न (प्राप्त) है। यह अधिनियन दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (के.अ.ब्यूरो) के सदस्यों के साथ केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों को समाधिकारी तथा सहवर्ती शक्तियां, कर्तव्य विशेषाधिकार तथा दायित्व प्रदान करती है। केन्द्र सरकार केन्द्र शासित क्षेत्रों के अलावा संबंधित राज्य सरकार की स्वीकृति से के.अ.ब्यूरो के अन्वेषण के सदस्यों की शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार को बढा सकती है। इन शक्तियों का प्रयोग करते समय के.अ.ब्यूरो के सदस्य, उप-निरीक्षक या उसके ऊपर के रैंक के अधिकारी संबंधित क्षेत्राधिकार के पुलिस स्टेशनों के प्रभारी अधिकारी होंगे। के.अ.ब्यूरो केवल उन्हीं अपराधों का अन्वेषण कर सकती है जोकि केन्द्रीय सरकार द्वारा दि.वि.पु.स्था. अधिनियम द्वारा अधिसूचित किया गया है।

के.अ.ब्यूरो की राज्य पुलिस की तुलना में क्षेत्राधिकार

कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है तथा अपराध के अन्वेषण करने की मौलिक क्षेत्राधिकार राज्य पुलिस में निहित है। इसके अलावा, सीमित संसाधनों के कारण के.अ.ब्यूरो सभी तरह के अपराधों का अन्वेषण नहीं कर सकती। के.अ.ब्यूरो निम्नलिखित मामलों में अन्वेषण कर सकती है-

  • मामले जो पूर्णत: केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के विरूद्ध हो या केन्द्र सरकार के मामलों से संबंधित हो।
  • मामले जिसमें केन्द्र सरकार के वित्तीय हित निहित हो।
  • मामले जो केन्द्रीय विधि के भंग होने से संबंधित हो जिसके प्रवर्तित होने से भारत सरकार संबद्ध हो।
  • कंपनियों के धोखाधड़ी, जालसाजी, गबन और ऐसे मामले जिसमें बड़ी पूंजी शामिल हो तथा ऐसे दूसरे मामले जो संगठित गिरोह तथा पेशेवर अपराधियों द्वारा किए गये हो जिनका संबंध कई राज्यों से हो।
  • मामले जो अंतर्राज्यीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रशाखन (International Ramification) युक्त हो तथा जिसमें विभिन्न शासकीय एजेंसियां शामिल हो, जहां सभी दृष्टिकोण से यह अनिवार्य समझा जाए कि एक अकेली अन्वेषण एजेन्सी को उक्त अन्वेषण का प्रभारी होना चाहिए।


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